

सहारनपुर में ‘ऑपरेशन सवेरा’ का बड़ा विस्फोट — 1.08 करोड़ की स्मैक के साथ अंतर्राज्यीय ड्रग नेटवर्क का शातिर तस्कर गिरफ्तार, UP–बॉर्डर पर नशा माफिया की रीढ़ पर एक और करारा वार
सहारनपुर। नशे के खिलाफ उत्तर प्रदेश में चल रहे अब तक के सबसे आक्रामक और व्यापक अभियान “ऑपरेशन सवेरा — नशे के अंधकार से जीवन के उजाले की ओर” के तहत रविवार को सहारनपुर पुलिस और ANTF ने एक बार फिर एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज करते हुए अंतर्राज्यीय ड्रग सिंडिकेट के शातिर सदस्य को भारी मात्रा में स्मैक के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने छापेमारी कर आरोपी शौएब पुत्र साजिद, निवासी तितरवाड़ा, थाना कैराना जनपद शामली, को 543 ग्राम उच्च–गुणवत्ता वाली स्मैक (अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत लगभग ₹1 करोड़ 08 लाख) के साथ पकड़ा है, जो पश्चिमी यूपी, उत्तराखंड और हरियाणा में सक्रिय नशा नेटवर्क का एक अहम खिलाड़ी बताया जा रहा है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी गंगोह क्षेत्र में एक बड़ी डिलीवरी देने वाला है। इसके बाद थाना गंगोह पुलिस और एण्टी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने तीतरी तिराहे पर रणनीतिक घेराबंदी कर ऑपरेशन को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन, काला बैग और ₹1000 नकद भी बरामद हुआ, जो उसके नेटवर्क की आगे की कड़ी तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी और DIG सहारनपुर रेंज के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई, जो इस बात का प्रमाण है कि सहारनपुर पुलिस अवैध नशीले पदार्थों के खिलाफ न सिर्फ गंभीर है बल्कि संगठित तरीके से, वैज्ञानिक और इंटेलिजेंस–आधारित रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्र बताते हैं कि शौएब का नेटवर्क कैराना, देवबंद, गंगोह, शामली, करनाल, यमुनानगर और देहरादून तक फैला हो सकता है। प्राथमिक पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को बड़े गिरोह, सप्लाई चेन, वित्तीय नेटवर्क और बॉर्डर–लिंक से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण इनपुट मिले हैं, जिन्हें खुफिया एजेंसियां गंभीरता से खंगाल रही हैं। पुलिस सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि यह गिरोह अफगान–पाक नेटवर्क से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के माध्यम से नशा मंगवाने में शामिल हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि विस्तृत पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद ही होगी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ थाना गंगोह में NDPS एक्ट की धारा 8/21(C)/29 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया है और उसे रिमांड पर लेकर अन्य साथियों की तलाश की तैयारी चल रही है। वहीं सहारनपुर पुलिस इस ऑपरेशन को केवल एक गिरफ्तारी नहीं बल्कि नशा व्यापार की रीढ़ पर सीधा वार मान रही है, जिसने पश्चिमी यूपी और हरियाणा बॉर्डर पर सक्रिय नेटवर्क को जबरदस्त झटका दिया है। SSP ने साफ संदेश दिया है कि नशा बेचने वालों के लिए सहारनपुर में कोई जगह नहीं — या तो सुधारें या जेल जाएँ, और यदि उससे भी आगे गए तो संपत्ति कुर्की और गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई झेलनी होगी।
इस हाई–प्रोफाइल ऑपरेशन में उपनिरीक्षक अतुल कुमार, रवि कुमार, नवीन कुमार, अवधेश कुमार और संयुक्त पुलिस टीम ने भूमिका निभाई। पुलिसकर्मियों की सतर्कता, सूझबूझ और तेज़ी से की गई कार्रवाई से न सिर्फ एक भारी मात्रा में स्मैक बाज़ार में पहुँचने से रुक गई बल्कि उन परिवारों के सपनों को भी बचाया जा सका जो नशे के शिकार बनकर बर्बाद हो जाते। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की घोषणा कर रखी है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व गृहमंत्री की स्पष्ट नीति है कि नशा माफिया अगर सुधार न ले तो उन्हें माफ नहीं किया जाएगा।
यह भी महत्वपूर्ण है कि सहारनपुर—देवबंद—शामली—कैराना बेल्ट पर लंबे समय से ड्रग नेटवर्क की गतिविधियों के संकेत मिल रहे थे, जिनमें कई नए नाम जुड़ रहे थे। ऑपरेशन सवेरा ने पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई नेटवर्क्स को ध्वस्त किया है और यह सफलता उसी कड़ी की एक और मजबूत उपलब्धि है। कानून–व्यवस्था तंत्र का दावा है कि आने वाले दिनों में इसी नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं और गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस साइबर सेल, खुफिया विभाग और नारकोटिक्स सेल मिलकर आरोपी के मोबाइल डेटा, बैंक ट्रांज़ैक्शन और कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। यह भी संभावना जताई जा रही है कि आरोपी के पास से मिले छोटे कैश और सीमित फोन रिकॉर्ड केवल “कवर सिस्टम” हो सकते हैं और वास्तविक डीलिंग क्रिप्टो, UPI ब्लैक चैनल और वॉलेट ट्रांसफर के जरिए होती हो।
पुलिस और प्रशासन का यह भी दावा है कि ऑपरेशन सवेरा सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि नशा पीड़ितों के पुनर्वास, समाज में जागरूकता और स्कूल–कॉलेज स्तर पर अभियान चलाकर युवाओं को नशे से दूर रखने का भी व्यापक प्रयास है, ताकि समाज में नशा केवल कानून से नहीं बल्कि सोच से भी खत्म हो। यह गिरफ्तारी न सिर्फ कानून प्रवर्तन की सफलता है बल्कि उस संदेश का प्रतीक है कि पुलिस नशे के खिलाफ युद्ध में पूरी तैयारी और आक्रामक रणनीति के साथ खड़ी है — और इस लड़ाई में हर परिवार, हर नागरिक और हर युवा की सुरक्षा प्राथमिकता है।







